बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम का उद्देश्य कन्या शिशु की रक्षा और महिलाओं का सशक्तिकरण

अगरतला। सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम का उद्देश्य कन्या शिशु की रक्षा और महिलाओं का सशक्तिकरण है। यह कार्यक्रम 2015 में शुरू किया गया था। त्रिपुरा में केवल गोमती जिला ही इस कार्यक्रम में शामिल किया गया, जहां लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या कम है।

2011 की जनगणना के अनुसार गोमती जिले में बालक-बालिका अनुपात लगभग नौ सौ 59 था। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत अपनाए गए उपायों से इस वर्ष यह अनुपात बढ़कर नौ सौ 62 हो गया है। छह वर्ष तक के आयु वर्ग में यह अनुपात 2011 के नौ सौ 40 से बढ़कर नौ सौ 43 हो गया है। जिला प्रशासन लड़कों की तुलना में लड़कियों का अनुपात और बढ़ाने के लिए जागरूकता के कुछ नये उपाय शामिल कर रहा है।

त्रिपुरा में गोमती जिला प्रशासन ने बेटियों को बचाने और लड़कियों को सशक्‍त बनाने के अभियान के लिए रविन्‍द्र नाथ टैगोर के रक्‍तकारबी से एक चरित्र नंदिनी चुना है। इस अभियान के अंतर्गत आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और खेलकूद के लिए महिलाओं के उत्‍कृष्‍ट योगदान के लिए नंदिनी पुरस्‍कार दिया जाता है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के तहत लड़कियों और उनके माता-पिता के लिए नंदिनी उद्यान बनाया गया है।

इसके अलावा यह अवार्ड स्‍कूल की छात्राओं को शिक्षा में अच्‍छे प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली तृषा सरकार ने कहा कि यह पुरस्‍कार प्राप्‍त करने के बाद लोग उसे राज्‍य की एक प्रतिष्ठित नागरिक के रूप में देखते हैं, जिससे वह गर्व महसूस करती है –
गोमती जिले के डी.एम और कलैक्‍टर रावल एच. कुमार ने कहा कि – आने वाले दिनों में भी डी.एम ने कहा कि गोमती जिला प्रशासन प्रभावी संचार रणनीति के साथ इस योजना का प्रचार करेगा।



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