इस माता का नाम से ही अपने आप खुल जाती हैं हथकडिय़ां और बेडिय़ां

नई दिल्ली। हमारे देश में देवी-देवताओं के कई चमत्कारिक मंदिर हैं। यहां भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इन मंदिरों में जहां भगवान को प्रसन्न करने के लिए मिठाई, वस्त्र आदि चढ़ाए जाते हैं, वहीं एक ऐसा भी मंदिर है जहां हथकड़ी और बेडिय़ां चढ़ाई जाती हैं। यह मंदिर राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में है।

प्रतापगढ़ जिले के जोलर ग्राम पंचायत में दिवाक माता का एक पुराना मंदिर है, यह मंदिर देवलिया के पास घने जंगलों में है। इस मंदिर के चारों और घना जंगल है। छोटी बड़ी पहाडिय़ों को पार कर यहां तक पहुंचा जा सकता है। दिवाक माता के प्रति लोगों की इतनी भक्ति है कि लोग काफी दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हंै। बताया जाता है कि यहां पर कुछ हथकडिय़ां तो सालों पुरानी भी हैं।

मान्यता है कि दिवाक माता के नाम से ही हथकडिय़ां और बेडिय़ां अपने आप खुल जाती हैं। एक समय जान मालवा के इस पहाड़ पर खूंखार डाकुओं का हमला हुआ था, तब डाकू यहां मन्नत लेते थे कि अगर वे डाका डालने में सफल हुए और पुलिस के चंगुल से बच गए तो वे यहां आकर हथकड़ी और बेडिय़ां चढ़ाएंगे। बस तभी से यहां पर हथकडिय़ां और बेडिय़ा चढ़ाई जाती है।

इसके अलावा लोगों का कहना यह भी है कि यहां पर एक पृथ्वीराना नाम एक डाकू रहता था जिसने दिवाक माता से मन्नत ली थी कि अगर वह जेल तोड़कर भागने में सफल रहा तो सीधा यहां दर्शन के लिए आएगा। गांव के लोगों का कहना है कि दिवाक माता का नाम लेने से ही उसकी हथकडिय़ां टूट गयी और वह जेल से भागने में सफल हो गया। तब से ही यह परम्परा चली आ रही है। अगर कोई भी व्यक्ति अपने रिश्तेदार या अपने अपरिजन को जेल से छुड़वाना चाहता है तो यहां आकर हथकड़ी या बेडिय़ां चढ़ा देता है।

 



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *