Virat Post

Rajasthan News Site

Corana virus : जिंदगी थम गई … लोग घरों में क़ैद हैं।

लेखक : डॉ. अनुराग सिंह चौहान

जिंदगी थम गई … लोग घरों में क़ैद हैं I वैश्विक महामारी का एक अनचाहा सकारात्मक पक्ष भी उभर कर आया है I दौडती भागती जिंदगी का अचानक थम जाना ,परिवार के सभी सदस्यों का घर में एक साथ होना I इस  महामारी से विश्व को मुक्ति हेतु प्रार्थना करना, अजीब से भय से मुक्ति दिलाता प्रतीत होता हैI

हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकट की घड़ी में पूरे भारतवर्ष द्वारा  थालियाँ , घंटियों व तालियों की करतल ध्वनि से पुलिस प्रशासन, चिकित्सा जगत और स्वयंसेवी संघटनो का साधुवाद भारतीय एकता के नये सूत्रों से परिचय करवाता है I

वहीं शहरों से पलायन करते लोग गाँवों में सुकून तलाशने की चाह लिए बेचैन नजर आ रहे हैं, बंद घरो में एक नया भारतीय परिवार करवट ले रहा है I संयुक्त परिवार का गुजरा हुआ कल आज सामने आ खड़ा हुआ है, निश्चित दूरी बनाते हुए घर-परिवार एक साथ हँसी ठिठोली करते हुए जी रहे हैं I

बेशक प्रकृति नाराज है… मनुष्य घर में कैद है I सड़कों पर सन्नाटा पसरा हैं, पर पक्षियों का कलरव.. चिडियों की चहचाहट.. कबूतरों की गुटरगूं साफ संकेत दे रहे हैं कि मशीनीकरण  से बाहर आओ प्रकृति बहुत खूबसूरत है, वो बुला रही है I शहरीकरण ने आम आदमी का सुकून लील लिया है.. कोरोना महामारी ने भीषण दुःख-चिंताओ के साथ मानव के प्रकृति से सम्बंध पर दुबारा विचार करने की संभावनाए प्रदान की हैं I

भारतीय समाज के अभिवादन ‘नमस्ते ‘को विश्व अपना रहा है, वहीं भारतीयों की शाकाहारी परम्परा का वैश्विक स्वागत भारतवर्ष की नेतृत्व क्षमता को स्पष्ट कर रहा है I सम्पूर्ण विश्व भारतीयों के शवदाह संस्कार (अग्नि द्वारा शव जलाना ) को श्रेष्ठ मानकर बीमारीयों के प्रसार को रोकने में कारगार मान चुका है I

 वस्तुतः कोरोना महामारी भारतीय समाज को आत्ममंथन का अवसर प्रदान कर रही है, प्रकृति से अनावश्यक छेड़छाड़ बंद करो और बौद्धदर्शन के ध्येय वाक्य ‘ जीओ और जीने दो ’ को व्यवहार में प्रयोग लाते हुए वैश्विक सुरक्षा, प्रसन्नता एवम समृधि  का मार्ग प्रशस्त करें  |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *