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साल में सिर्फ तीन महीने खुलता है यह मंदिर, जाने से 41 दिन पहले करना पड़ता है ब्रह्मचर्य का पालन

तिरुवनंतपुरम । सबरीमाला मंदिर केरल के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। एक अनुमान के अनुसार केरल के इस मंदिर को धर्मावलम्बियों के दर्शन के मामले में मक्का-मदीना के बाद दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ स्थानों में माना जाता है। सबरीमाला में भगवान अयप्पा विराजते हैं।


शबरी के नाम से पड़ा मंदिर का नाम :
किदवंती के अनुसार सबरीमाला का नाम राम भक्त शबरी के नाम पर पड़ा है। जिसने भगवान राम को जूठे फल खिलाए थे और राम ने उसे नवधा-भक्ति का उपदेश दिया था। ये मंदिर चारों तरफ से पहाडिय़ों से घिरा हुआ केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किलोमीटर दूर पहाडिय़ों पर स्थित है। पंपा से जंगल के रास्ते पांच किलोमीटर पैदल चलकर 1535 फीट ऊंची पहाडिय़ों पर चढ़ते हुए इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 18 पवित्र सीढिय़ां चढऩी पड़ती है। इसके बाद सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा के दर्शन प्राप्त होते हैं।


कौन थे भगवान अयप्पा?
भगवान अयप्पा के पिता शिव और माता मोहिनी हैं और इसी के प्रभाव से सस्तव नामक पुत्र का जन्म हुआ, जिन्हें दक्षिण भारत में अयप्पा कहा गया था। शिव और विष्णु से उत्पन्न होने के कारण अयप्पा को हरिहरपुत्र भी कहा जाता है। साथ ही भगवान अयप्पा को मणिकांता, अयप्पन और शास्ता नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण भारत में कई प्रमुख मंदिर है जिसमें से सबरीमाला एक है।

किदवंती के मुताबिक समुद्र मंथन के दौरान भोलेनाथ भगवान विष्णु के मोहिनी रूप पर मोहित हो गए। मोहिनी और भगवान शिव से जिस बच्चे का जन्म हुआ, उसे उन्होंने पंपा नदी के तट पर छोड़ दिया और राजा राजशेखरा ने उस बालक को 12 सालों तक पाला। राजशेखरा ने उन्हें अयप्पा नाम दिया। अयप्पा को एक समय अपनी माता के लिए शेरनी के दूध की आवश्यकता पड़ी, जिसे लेने वे जंगल गए। यहीं पर अयप्पा ने राक्षसी महिषि का वध किया था। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार ‘महर्षि परशुरामÓ ने अपनी कुल्हाड़ी के वार से केरल को समुद्र से ऊपर उठाया और सबरीमाला में अयप्पा की मूर्ति स्थापित की थी।


मकर संक्रांति पर दिखाई देती है ज्योति :
इस मंदिर का एक और अनूठा पहलू यह है कि यह पूरे साल नहीं खुलता है। यह केवल मंडलपूजा, मकरविलाक्कु और विशु के दौरान (नवंबर से जनवरी) तक पूजा के लिए खोला जाता है। लोगों का ऐसा मानना है की मकर संक्रांति की रात घने अंधेरे में यहां एक ज्योति दिखती है। इस ज्योति के दर्शन के लिए दुनियाभर से हजारों श्रद्धालु हर साल मकर संक्रांति पर यहां इक_े होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि तीर्थयात्रियों को सबरीमाला जाने से 41 दिन पहले ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना पड़ता है।


सबरी माला मंदिर विवाद :
भारत के सबसे अधिक साक्षर राज्य का दर्जा प्राप्त केरल के इस सबरीमाला मंदिर में केवल पुरुष ही जा सकते हैं। इस मंदिर में 10 वर्ष से अधिक और 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं का जाना वर्जित है। मंदिर की पौराणिक परंपरा के अनुसार सबरीमाला मंदिर के विराजे हुए भगवान श्री अयप्पा ब्रह्माचारी थे, हिंदू धर्म में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान ‘अपवित्रÓ माना जाता है। इस कारण यहां 10 से 50 वर्ष की लड़कियों और महिलाओं का आना वर्जित है।

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