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कैंसर के लिए औषधी के साथ परहेज जरूरी : महामंडलेश्वर हंसराज महाराज

भीलवाडा। मोतीबोर का खेड़ा स्थित श्रीनवृग्रह आश्रम में शनिवार को हरिसेवा धाम के महंत महामंडेलश्वर स्वामी हंसरामजी ने अवलोकन किया। इस दौरान स्वामी हंसरामजी ने करीब दो घण्टे से भी ज्यादा समय में आश्रम की प्रत्येक गतिविध का बारीकी से जानकारी ली और इसे अद्भुत मिसाल बताया।

महामंडलेश्वर हंसरामजी ने कहा कि आश्रम संचालक हंसराज चौधरी का आत्मबल व विश्वास से ही कैंसर रोगियों का रोग मुक्त हो रहा है। इस दौरान महामंडलेश्वर हंसरामजी ने आश्रम में नव स्थापित नवग्रह आयुष विज्ञान मंदिर को भी देखा तथा इसे विज्ञान व अध्यात्म चिकित्सा के लिए उत्कृष्ट बताया। महामंडलेश्वर हंसरामजी ने कहा कि नवग्रह आश्रम में आयुर्वेद जो सनातन काल से हमारी चिकित्सा पद्वति रही है और इसे जिंदा रखकर उसके माध्यम से कैंसर जैसी असाध्य बिमारी का उपचार किया जाना बहुत ही मायने रखता है।

उन्होंने कहा कि आज प्रदुषण ने हमारा जीवन खोखला कर दिया है। भीलवाड़ा में कपड़ा प्रोसेस होने के बाद प्रदुषण चहुंओर बढ़ रहा है, इसकी रोकथाम के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण आज भीलवाड़ा में हड्डी जोड़ व दंत रोग के निदान केंन्द्रों की संख्या बढ़ रही है। यह सब प्रदुषण का ही प्रभाव है। कैंसर रोग बढऩे का कारण भी यहीं है। परंतु आश्रम में पहुंच कर आयुर्वेद वनस्पतिक चिकित्सा पद्वति सेे अब उपचार संभव हो पा रहा है। उन्होंने आश्रम संचालन समिति के प्रति मंगलकामनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि कैंसर रोग के उपचार में उनके या उनकी संस्था की जहां जरूरत होगी वो मदद करेगें।

आश्रम संस्थापक हंसराज चौधरी ने नवग्रह आयुष विज्ञान मंदिर की स्थापना व उसके उदेश्यों की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यहां पर विज्ञान, ज्योतिष की जानकारी मुहैया करायी जायेगी ताकि हर आम आदमी ग्रहों की स्थिति के बारे में सामान्य जानकारी प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि कैंसर रोगी को उपचार में परहेज में विशेष ध्यान देना होता है। परहेज ही औषधी का सहायक बनकर कैंसर रोग का उपचार करता है। इस अवसर पर आयुर्वेदाचार्य मोहनदास महाराज ने भी नवग्रह आश्रम का अवलोकन किया तथा दो वर्ष में ही आश्रम की ख्याति दुनियां भर में फैलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि दो वर्ष पूर्व वो यहां प्रवास कर चुके है। आज प्रसन्नता है कि यहां 415 प्रकार के औषधीय पौधे स्थापित है।

महामंडलेश्वर का संस्थापक हंसराज चौधरी ने शॉल ओढ़ाकर व साहित्य भेंट कर अभिनंदन व सम्मान किया। बाद में उन्होंने नवग्रह आश्रम में आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डा. शिवशंकर राड़, डा. लोकपाल आर्य, डा. प्रदीप चौधरी, डा. जितेंद्र कुमार के अलावा आश्रम के सुरेंद्र सिंह, महिपाल चौधरी, प्रवेश आचार्य, अजय चौधरी, चरणसिंह से गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

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