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कौमी एकता हमारी संस्कृति की पहचान : कला एवं संस्कृति मंत्री

जयपुर। कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने कहा कि कौमी एकता हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान है। संविधान के जरिए यह कौमी एकता ही हमारे देश को मजबूती देकर आपसी भाइचारे और सौहार्द को बढ़ाती है। उर्दू के महान् शायरों ने संगीत के क्षेत्र में गजल के द्वारा इसे अवाम तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया है। आज की यह खूबसूरत शाम दो बडे फनकारों गजल सम्राट जगजीत सिंह एवं बेगम अख्तर को श्रद्धांजलि है जिनकी अथक मेहनत से गजल अवाम और ख्वास दोनों के बीच मकबूल हुई है। उर्दू शायरी वली दखनी से शुरू होती हुई मीर तकी मीर, मिर्जा गालिब, दाग दहल्वी, अल्लामा इकबाल, रघुपति सहाय, फिराक़ गोरखपुरी, जिगर मुरादाबादी से होती हुई मौजूदा दौर में शीन काफ़ निजाम तक पहुंची है।

मंत्री डॉ कल्ला बतौर मुख्य अतिथि रविवार की शाम राजस्थान उर्दू अकादमी, जयपुर द्वारा रामनिवास बाग स्थित रवीन्द्र मंच पर ’’कहानी गजल की‘‘ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी कलाकारों का राजस्थान की जनता की ओर से इस्तकबाल करते हुए गालिब सम्मान से नवाजे जाने पर उस्ताद अहमद हुसैन एवं उस्ताद मोहम्मद हुसैन को मुबारकबाद दी और कहा कि हुसैन बंधुओं ने गजलों और भजनों के माध्यम से हमारे सूबे का नाम रोशन किया है। राजस्थान उर्दू अकादमी उन्हें सम्मानित कर गौरवान्वित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी श्रीमती रोली सिंह भी इस गजल परम्परा को अपनी सुरीली आवाज से आगे बढ़ा रही है।

संभागीय आयुक्त जयपुर के. सी. वर्मा ने कहा कि उर्दू विभाग अच्छा कार्य कर रहा है। उन्होंने प्रदेश की अन्तर्राष्ट्रीय हस्तियों हुसैन बंधुओं को गालिब सम्मान दिए जाने पर बधाई दी। उर्दू शायरी और गजल के इतिहास को मशहूर फिल्म अदाकार जनाब रज़ा मुराद साहब ने अपनी मखमली आवाज से बयां करते हुए कहा कि गजलों ने कईं सौ सालों से दुनियांभर में दिलों पर राज किया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख शासन सचिव श्रेया गुहा ने की।

कार्यक्रम में गजलों की ऎसी महफिल सजी कि श्रोता झूमते नजर आए। चन्दन दास ने गजल ‘‘न जी भर के देखा, न कुछ बात की………, बडी आरजू थी मुलाकात की‘‘ पेश की। अमजद खान साहब ने तबले पर अपना फन पेश किया। राधिका चौपड़ा, सना खान आदि कलाकारों ने कार्यक्रम में समां बांध दिया। इससे पूर्व सभी अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर, शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का विधिवत् औपचारिक शुभारंभ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर सचिव राजस्थान उर्दू अकादमी के सचिव जनाब मोअज़्ज़म अली सहित कला एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे । समारोह का संचालन मोहतरमा सालेहा ग़ाज़ी ने किया।

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