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देश के हजारों रोगी नवग्रह आश्रम से ले चुके है लाभ : डा. गेना

भीलवाड़ा। कृष्णगोपाल आयुर्वेद औषधालय के ट्रस्टी डा. सी बी गेना ने कहा है कि भारत की पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्वति को संरक्षित करने का भागीरथ प्रयास करने का दूसरा नाम भीलवाड़ा जिले का श्री नवग्रह आश्रम है। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति रह चुके डा. गेना ने श्री नवग्रह आश्रम मोतीबोर का खेड़ा में हर्बल गार्डन व यहां की चिकित्सा पद्वति का बारीकी से अवलोकन किया।

डा. गेना ने कहा कि श्री नवग्रह आश्रम आज सही अर्थों में आयुर्वेद के संरक्षण व उसके माध्यम से चिकित्सा किया जाना महत्वपूर्ण है। यहां के संस्थापक हंसराज चैधरी द्वारा तैयार किया गया हर्बल गार्डन प्रदेश में अनूठा है। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले रोगियों को समर्पण भाव व निष्ठा के साथ जिस शिद्दत से उपचार किया जा रहा है वो भी काबिले तारीफ है। कैसर रोगियों को नि:शुल्क दवा दिया जाना आज के भौतिकवादी युग में मानवता सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। जहां देश व दुनियां से रोगी पहुंच कर अब तक हजारों रोगी लाभान्वित हो चुके है।

वनस्पति पौधों पर शोध कर चुके डा. गैना ने बताया कि आयुर्वेद के माघ्यम से भारतीय चिकित्सा पद्वति के पुर्नस्थापना व उसके संरक्षण के लिए यहां किये गये प्रयास आयुर्वेद का खजाना है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा यहां पौधों की संख्या को बढ़ाने के लिए उनकी ओर से हर संभव प्रयास किया जायेगा।

इस दौरान कृष्णगोपाल आयुर्वेद औषधालय की अजमेर में स्थित रसायनशाला के प्रबंधक नरसिंह राम काला ने कहा कि श्री नवग्रह आश्रम हंसराज चैधरी के जज्बे व जुनून का ही परिणाम है। वानस्पतिक द्रव्यों से कैंसर जैसी बिमारियों का उपचार किया जाना संभव है। यह रोग अति प्रदुषण, अति तनाव, अति रूग्णता से होता है, वानस्पतिक द्रव्यों के सेवन से इस रोग का उपचार होता है। यह साबित भी कर रहा है कि नवग्रह आश्रम में आने वाले रोगियों को आयुर्वेद के शास्त्रों के आधार पर उपचार मिल रहा है।

इनके साथ ही आश्रम पहुंचे राजस्थान के चिकित्सा विभाग के जेएलएन हास्पिटल अजमेर के उपनिदेशक डा. भंवर खलदा ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्वति आयुर्वेद का आज भी महत्व है। सरकारी स्तर पर इसे संरक्षित करने की महत्ती जरूरत है। कैंसर जैसी कई अन्य बिमारियों के उपचार में एलोपेथी व आयुर्वेद को संयुक्त रूप से योजनाबद्व तरीके से इस्तेमाल होने पर रोगी को जल्दी इसका लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि देश में आयुर्वेद व एलोपथी को एक छत के नीचे लाकर संयुक्त रूप से उपचार करने की जरूरत है।

श्री नवग्रह आश्रम पहुंचे महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति रह चुके व वर्तमान में कृष्णगोपाल आयुर्वेद औषधालय के ट्रस्टी डा. सी बी गेना तथा कृष्णगोपाल आयुर्वेद औषधालय की अजमेर में स्थित रसायनशाला के प्रबंधक नरसिंह राम काला ने यहां पर हर्बल गार्डन व नव स्थापित नवग्रह आयुष विज्ञान मंदिर को देखा तथा इसे प्रदेश में अनूठा बताया।

आश्रम संस्थापक हंसराज चौधरी ने नवग्रह आश्रम, आयुष विज्ञान मंदिर की स्थापना व उसके उदेश्यों की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यहां पर विज्ञान, ज्योतिष की जानकारी मुहैया करायी जायेगी ताकि हर आम आदमी ग्रहों की स्थिति के बारे में सामान्य जानकारी प्राप्त कर सके। उन्होंने बताया कि कैंसर रोगी को उपचार में परहेज में विशेष ध्यान देना होता है। परहेज ही औषधी का सहायक बनकर कैंसर रोग का उपचार करता है। अब तक यहां पर हजारों रोगी लाभान्वित हो चुके है। प्रति सप्ताह उपचार प्राप्त करने वाले रोगियों की संख्या 3 हजार से ज्यादा बढ़ रही है।

संस्थापक हंसराज चौधरी ने दोनों अतिथियों का साहित्य भेंट कर अभिनंदन व सम्मान किया। बाद में उन्होंने नवग्रह आश्रम में आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डा. शिवशंकर राड़, डा. लोकपाल आर्य, डा. प्रदीप चौधरी, डा. जितेंद्र कुमार के अलावा आश्रम के जितेंद्र चौधरी, सुरेंद्र सिंह, महिपाल चौधरी, प्रवेश आचार्य, अजय चौधरी, चरणसिंह से गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

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